अजब गजबबीकानेर

यहाँ मिठाई नमकीन से ज्यादा खाई जाती सुपारी है, हर तरह की सुपारी के शौकीन बीकानेरी !

बीकानेर
खटे – मीठ्ठे, चरके स्वाद का जायका लेने के इतर बीकानेर शहर में सुपारी खाने वाले लोगों की तादाद मिठाई और नमकीन के शौकीन लोगों से ज्यादा है। देश में सबसे ज्यादा सुपारी का प्रसंस्करण और व्यापार बीकानेर में होता है। जहां सुपारी पैदा होती है वहां से ट्रकों के ट्रक बीकानेर के व्यापारियों के पास आते हैं। यहां सुपारी की पॉलिश होती है।

कच्ची सुपारी यहां आती है। बीकानेर में गर्मी होने और आन्द्र्रता नहीं होने से सुपारी मौसम के कारण सूख जाती है। यहां पॉलिश, कटाई और छंटाई कर देश में बेचने के लिए भेजी जाती है। अगर आप किसी के घर मेहमान बनकर जाते हैं तो खाने और नाश्ते के बाद आपकी सुपारी से जरूर मनुहार की जाती है।

बीकानेर में छायली सुपारी, चिकनी सुपारी (मुम्बई) तथा असम की सुपारी आती है। यहां सुपारी का आयुर्वेदिक औषधि में भी उपयोग किया जाता है। श्वेत प्रदर में रोगी को नाजुक सुपारी खाने से फायदा होता है। माजूम सुपारी तथा मोहता रसायनशाला अथवा डाबर का सुपारी पाक भी आयुर्वेदिक औषधि के रूप में काम लिया जाता है। वैसे छायलिया सुपारी पान में खाई जाती है।

बीकानेर में सुपारी के पारखी और खाने के शौकीनों में महिलाएं भी कम नहीं हैं। वैसे सुपारी का स्वाद और इसमें प्राकृतिक रसायन बार -बार खाने से लार और रक्त की जरूरत बन जाते हैं। सुपारी खाने वाले को सुपारी की तलब होने लगती है। आयुर्वेद के हिसाब से सुपारी खाना स्वास्थ्यवध्र्दक माना जाता है।

हालांकि सुपारी ज्यादा खाना भी नुकसानदायक माना गया है। सुपारी की किस्मों के जानकार बाबू बिहाणी का कहना है कि लोग जैसे इलायची खाते हैं वैसे ही मुंह के स्वाद के लिए सुपारी खाते हैं। बीकानेर में सुपारी 400 रुपए किलो से चार हजार रुपए किलो तक मिलती है।

पत्रिका समाचार

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