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बीकानेर: आवारा गौवंश को शहर से बाहर भेजने के लिए गुडाळिया यात्रा निकाली!

बीकानेर : शहर में लगातार बढ़ रही आवारा गौवंश की संख्या ने अब भयंकर समस्या रूप ले लिया है। दुकानों पर से फेंकी जाने वाली थैलियां,  सड़ी – गली सब्जियां अन्य कचरा खाकर बेचारे  बेमौत मर रहे है । शहर की सड़कों पर बेतरतीब घूम रहे ये सांड (गोधे) आम  राहगीरों  के लिए भी बेहद खतनाक बने हुए है।  ये आवारा सांड  राह चलते  लोगों को घायल कर देते है। इनके सींगों से चोटिल  होकर रोज़ कोई ना कोई बेमौत मारा जाता है । 

12 हज़ार से अधिक गौवंश भटक रहा है इधर – उधर

आज शहर में  इनकी संख्या 12 हज़ार  से अधिक हो चुकी है। आज कहने तो संभाग में बहुत सारी  सस्थाएं है जो गौरक्षा को लेकर काम कर रही है । पर सडकों पर आवारा  घुम रहे 12 हज़ार से अधिक गौवंश सुध लेने वाला कोई भी नहीं है। हालत ये है की प्रशासन भी अपनी आँखे मूंदे बैठा है । इसको लेकर नगर निगम में हल्ला तो रोज़ मचता है पर इसका परिणाम कुछ भी नहीं निकलता ।  बेचारा ये निराश्रित गोवंश राजनैतिक पार्टियों का चुनावी मुद्दा तो जरूर बनता है पर इन निरीह गौवंश के कोई कुछ भी नहीं करता ।  

घुटनों में बहने लगा खून फिर भी नहीं थमे

शुक्रवार को  इसी समस्या को लेकर  शहीद भगत सिंह संस्थान की ओर और से गुडाळिया यात्रा निकाली गयी ।  इस यात्रा में शहर के तीन चित्रकारों  जिसमे  मोना सरदार डूडी, मुकेश जोशी सांचीहारराजकुमार राजपुरोहित ने गाय और सांड के प्रतीक रूप में घुटनों के बल यात्रा की। यात्रा के दौरान  कलाकारों ने अपने सिर पर गाय व सांड के सिंग भी प्रतीक रूप में लगा रखे थे। यात्रा के दौरान कलाकारों के घुटने छील गए जिससे खून रिसने लगा। इस अजीब-ओ- गरीब प्रदर्शन को देखने के लिए लोगों की काफी भीड़ इकट्ठा हो गयी। रास्ते में लाल रंग का पानी सड़क पर बिखेर कर यह दर्शाया गया कि आवारा गोधे की टक्कर से कैसे व्यक्ति लहूलुहान हो जाता है।

निगम कार्यालय उपायुक्त ने सुनी मांगे 

यात्रा कोटगेट से शुरू होकर  नगर निगम पर जाकर खत्म हुई  । इस यात्रा के माध्यम से कलाकरों ने  निराश्रित गोवंश के संरक्षण, इनके लिए गोशाला का निर्माण करने, शहर में पॉलिथीन के उपयोग को बंद करवाने का संदेश प्रसारित किया गया। जब  यात्रा नगर निगम पहुंची तो उन्हें ना तो  नगर निगम महापौर नारायण चौपड़ा मिले और ना ही निगम आयुक्त निकाय गोहाएन। उपायुक्त डॉ.राष्ट्रदीप यादव ने तीनों चित्रकारों की भावना को समझते हुए निगम कार्यालय से बाहर सड़क मार्ग तक आए व चित्रकारों की मांगों को सुना।

 

 

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