बीकानेर

डूंगर कॉलेज की इस निर्दलीय प्रत्याशी का फेसबुक लाइव खूब हो रहा है वायरल !

बीकानेर। बीकानेर में इन दिनों छात्रों का चुनावी घमासान जोरों पर है। इसी के चलते छात्र चुनाव प्रचार के लिए सोशल मीडिया का जमकर उपयोग कर रहे है, साथ ही एक दूसरे पर आरोप – प्रत्यारोप लगाने का सिलसिला जारी है। कल मतदान होना है हालांकि नियमों के हिसाब से आचार सहिंता लग चुकी है फिर भी छात्र अंदर खाने वोट पाने के लिए जी जान से जुटे है। फेसबुक व्हाट्सप्प के माद्यम से हर छात्र तक पहुंच बनाई जा रही है।  इसी के चलते फेसबुक पर डूंगर कॉलेज निर्दलीय प्रत्यासी एवं एनएसयूआई से बागी छात्र नेता निकिता बाना का फेसबुक पर भावुक अपील का वीडियो खूब वायरल हो रहा है जिसे अब तक हज़ारों लोगों ने शेयर किया और कमेंट बॉक्स में साथ खड़े रहने का भरोसा दे रहे है।

 

बिना पैसों के नहीं मिलेगी टिकट

इसी के चलते  डूंगर कॉलेज से निर्दलीय अध्यक्ष पद की प्रत्याशी निकिता बाना ने सोशल मीडिया के माध्यम से भावुक अपील की है।  उन्होंने अपने इस फेसबुक लाइव में एनएसयूआई पार्टी के पदाधिकारियों पर धोखा देने के गंभीर आरोप लगाए है। निकिता ने अपने इस वीडियो में कहा की जब से कॉलेज में दाखिला लिया तब से एनएसयूआई संगठन के लिए जी जान से काम कर रही हूँ. मैंने संगठन के लिए बहुत कुछ किया लेकिन चुनाव के समय में मैंने पार्टी से टिकट के लिए दावेदारी पेश की तो पार्टी के लोगों ने ये कह कर किनारे कर किया की उसके पास चुनाव लड़ने के पैसे नही है इसलिए वो टिकट की हक़दार नहीं है. निकिता ने पार्टी पदाधिकारियों पर भेदभाव करने के आरोप लगाये।

दिया दीजिये बिना पैसों के भी चुनाव जीता जा सकता है

अपने लाइव वीडियो में निकिता बाना ने कहा की क्या चुनाव पैसों से लड़े जाते है यदि ऐसा है तो इन पैसों को कॉलेज के विकास में लगाया जाये तो आज कॉलेज का रूप अलग ही होता। उन्होंने बताया कि चुनाव में हर साल अध्यक्ष पद के प्रत्याशी द्वारा 30 से 40 लाख रुपए लगाये जाते है, और इतने पैसे मेरे पास नहीं है। अपने इस लाइव वीडियो के दौरान बाना ने भावुक होते हुए कहा कि अब मेरे लिए सभी रास्ते बंद हो गये है इसलिए सोशल मीडिया के माधयम से सभी छात्र/छात्राओं से अपील कर रही हूं, कि आप इस चुनाव में बता दीजिए कि बिना पैसे से भी चुनाव को जीता जा सकता है। मुझे आशा ही नहीं पूरा विश्वास है कि आप लोग मेरा साथ दोगे। मैं आपको विश्वास दिलवाती हूं कि मैं छात्रहितों के लिए हमेशा यूं ही संघर्ष करती रहूंगी।

 

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