बीकानेर

बीकानेर त्यौहार: महिलाओं व बालिकाओं का त्यौंहार है गणगौर !

बीकानेर: फागोत्सव के रंगों की बहार के बाद प्रकृति के परिवर्तन की उमंगों के त्यौहार गणगौर की पूजा शुरू हो गई है। होली के दूसरे दिन ही बालिकाएं और नव विवाहिताएं गणगौर की पूजा करती है। भौर में समूह में महिलाएं और बालिकाएं गीत गाते हुए बागों (उद्यानों ) में जाती हैं। वहां फूलड़े (फूल -पत्तियां) तोड़कर लाती हैं। भावी जीवन को गणगौर के रूप में देखकर अपने  सुन्दर जीवन की कल्पना गीतों में करती हैं। अपनी ईष्ट देवी गणगौर से सुन्दर वर, अच्छा  ससुराल  ननद तथा अन्य परिजनों की कामना करती हैं। इन दिनों गणगौर, ईशर और भाइया की लकड़ी की प्रतिमाओं का बाजार लगा हुआ है।

बड़ा बाजार स्थित भैरूजी की गली में महात्मा जाति के लोग गणगौर में रंग भरने, पोशाक तैयार कर बेचने का काम करते हैं। लकड़ी की  विभिन्न आकार की गणगौर सुथार जाति के कारीगर बनाते हैं। इसको सजाने संवारने तथा रंग भरने का काम महात्मा जाति के लोग करते हैं। बाजार में गणगौर विभिन्न आकार की होती है। गणगौर और ईशर आदम कद भी बनाए जाते हैं। गणगौर राजस्थान की लोक संस्कृति का बड़ा त्यौहार है। गणगौर का जोड़ा एक हजार से लेकर छह हजार तक बिकता है। पीढिय़ों से गणगौर बेचने का काम करने वाले आसू राम महात्मा ने बताया कि हर आकार -प्रकार की गणगौर बनाई जाती है। इन दिनों उनके पास हजार से बारह  सौ गणगौर बिकती है। वैसे हर जाति-समाज की गणगौर होती है। इन गणगौर को लोग सजाकर रखते हैं। गणगौर पूजन के दौरान गीत ही नहीं गाए जाते बल्कि महिलाएं गणगौर के आगे घूमर (नृत्य) भी करती हैं। होली के दूसरे दिन से 15 दिनों तक गणगौर का त्यौहार मनाया जाता है।संगीत, नृत्य और कला के साथ-साथ मनोरंजन और जनास्था के इस त्यौहार से राजस्थानी समाज गहरे से जुड़ा हुआ है। गणगौर को नारी के विभिन्न रूपों, भावों और सौन्दर्य बोध से जोड़ा गया है। नारी चेतना का यह अदभूत त्यौहार बीकानेर में परवान पर है।


गणगौर मेलों की होती है धूम, पुरुष भी गाते हैं गवरजा के गीत

गणगौर बालिकाओं और महिलाओं का पूरे एक पखवाड़े का त्यौहार है। इस त्यौहार में गणगौर को माध्यम बनाकर महिलाएं भावी जीवन के सुनहरे सपने बुनती है। गवरजा की पूजा के दौरान गीतों के माध्यम से अपने भावों को समर्पित करते हुए सुखद जीवन की कामना करती है। पूरे एक पखवाड़े की पूजा संवेदनाओं और भाव बोध को अपने में समाहित किए होती है। गणगौर को प्रसन्न करने के लिए गाए जाने वाले गीतों के शब्द और मधुरता सुनने वाले को भी भावनात्मक रूप से जोड़ लेते हैं। महिला केन्द्रित इस त्यौहार में पुरूष भी सहभागी रहते हैं। बीकानेर  शहर में कई जगह पुरूष भी गणगौर के गीत गाते हैं।   राजस्थान तथा प्रवासी राजस्थानी गणगौर के त्यौहार को धूमधाम से मनाते हैं। जगह-जगह पर गणगौर के मेले लगते हैं। जहां गणगौर की पूजा अर्चना के साथ ही गीत-नृत्य की प्रस्तुति के साथ उत्सव मनाया जाता है।सार्वजनिक मंचों से सांस्कृतिक आयोजन होता है। शहर में जाति विशेष की गणगौर भी अपनी काफी प्रसिद्ध है और वर्ष भर के आयोजनों में समाज विशेष के लोग अपनी गणौगर को स्वर्णाभूषण और महंगी पोशाकों के साथ गणगौर मंच पर लाई जाती है। बीकानेर में गणगौर की दौड़ आयोजित होती है।  गणगौर का व्रत रखने वाली महिलाएं  व्रत के उद्यापन पर परिजनों को भोजन करवाती हैं।

Tags
Show More

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Close

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker