नोखाबीकानेरबीकानेर संभागश्रीडूंगरगढ़

हर एक कॉल पर लगता है लाखों का दांव, शाम होते ही शुरू हो जाते है सट्टेबाज़

बीकानेर। हर बार की तरह इस बार भी देश में आईपीएल सीज़न की शुरवात होते ही बीकानेर संभाग के तमाम सट्टेबाज़ पूरी तरह से सक्रिय हो चुके है। आपको बता दे  बीकानेर में आईपीएल के दौरान बड़े पैमाने पर सट्टा कारोबार होता है।  इन सट्टेबाज़ों के तार मुंबई से लेकर दुबई तक जुड़े है। इस बार  आईपीएल सीज़न में जयपुर के बाद बीकानेर का दबदबा बना हुआ है। रोज़ लाखों करोड़ों के वारे – न्यारे किये जाते है इसे खेलने वाले ज्यादातर मध्यम वर्ग से जुड़े साधारण युवा होते है जिन्हे जल्दी अमीर बनने की चाहत होती है। इस चाहत के चलते वो अपना सब कुछ लुटाकर इन सट्टेबाज़ों के कर्ज़दार बन जाते है।


इस अवैध कारोबार में आज भी पांच सौ से अधिक लोग बुक्की या पंटर सक्रिय रूप से जुड़े  है।इनका काम  संभाग ले सीधे – साधे लोगों को अपने जाल में फ़साने का होता है। बीकानेर शहर में धड़ल्ले से चलने वाला अवैध कारोबार अब ग्रामीण इलाकों में भी पैर पसार रहा है।  बीकानेर शहर के बाद गंगाशहर, भीनाशहर, नोखा और  श्रीडूंगरगढ़ में बड़े पैमाने पर सट्टा खेला जाता है।  

यहां रोज़ शाम होते ही बीकानेर की तमाम छोटे मोटे सभी  बुकें (सट्टेबाज़ों के ठिकाने ) सजने लगती है। वैसे तो सारा काम  (गुप्त ठिकानों) बैठकर फोन पर किया जाता है इन सट्टेबाज़ों का असली ठिकाना चंद भरोसेमंद लोगों को ही पता होता है। असली खेल शुरू होता मैच शुरू होने के बाद, हर फोन कॉल पर लाखों करोड़ों का सट्टा खेला जाता है, मैच खत्म होते ही बुकी हिसाब-किताब बनाने बैठ  जाते है फिर दिन भर वसूली का खेल चलता है और शाम होते ही फिर से वही खेल शुरू हो जाता है आपको बता दे वसूली का काम गुंडे मवाली टाइप के लोगों को सौंपा जाता है ताकि डरा धमका कर पैसों की उगाही की जा सके।


पुलिस की सह पर चलता है ये कारोबार 

अवैध तरीके से चलते वाले इस कारोबार को संभाग की पुलिस से पूरी तरह से छूट मिली हुई है इसे चाहे राजनैतिक रसूकदार लोगों का दबाव कहें या इच्छा – शक्ति कमी, आज इस टेक्नोलॉजी के दौर में क्या कुछ मुमकिन नहीं है , यदि पुलिस चाहते तो 24 घंटों में इस सट्टेबाज़ी के नेटवर्क को तोड़ सकती है, मगर उन्हें ऐसा करना नहीं है, वो बस कार्यवाही के नाम पर छोटे – मोटे, जुआरी  पर्ची – सट्टा खेलने वाले पर छापे-मारी कर वाह – वाही लूट रही है।आखिर सब कुछ जानते हुए भी इन सटोरियों पर हाथ डालने से क्यों  घबरा रही पुलिस। 

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