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काल भैरव अष्टमी आज, मंदिरों में होगा विशेष श्रृंगार व महाअभिषेक का आयोजन!

 भैरव अष्टमी आज मंदिरों में विशेष श्रृंगार व महाअभिषेक का होगा आयोजन

बीकानेर: भैरव अष्टमी के पावन पर्व पर आज शहर के भैरव मन्दिरों में अनेक कार्यकम का आयोजित होगा। भैरव अष्टमी के मौके शहर के तमाम भैरव मंदिरों भेरुं बाबा का तेल से अभिषेक कर विशेष श्रृंगार कर महाआरती का आयोजन किया जायेगा। रात को जागरण के आयोजन भी रखे गये है। सोफिया स्कूल के सामने स्थित चमत्कारी भैरव मंदिर में सुबह हवन और विशेष श्रृंगार को लेकर गुरुवार को चमत्कारी भैरू सेवा समिति की बैठक रखी गयी।

शहर के विभिन्न मंदिरों में धूमधाम से मनाया जायेगा भैरव अष्टमी महोत्सव

नत्थूसर बास में स्थित  त्रिलोचन कोडाणा भैरव मंदिर में भैरव अष्टमी महोत्सव के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगें। सोनगिरी कुआं स्थित जबरेश्वर भैरवनाथ मंदिर में भैरव अष्टमी के मौके पर कई कार्यक्रम होंगे। बाबा सत्संग समिति के केशव स्वामी ने बताया कि इस दौरान महाआरती और जागरण का आयोजन होगा। श्रीमाली समाज महालक्ष्मी मंदिर, उस्तों की बारी में भैरव अष्टमी के मौके पर रविशंकर श्रीमाली के सानिध्य में भेरुं बाबा का  पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा।

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वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा अभिषेक किया जायेगा 

नत्थूसर गेट स्थित शिव शक्ति साधना पीठ में इस मौके पर पं.प्रदीप किराडू के सानिध्य में वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा अभिषेक किया जाएगा। खुंखार भैरव भक्त मंडल की ओर से भैरव मंदिर में हवन और अभिषेक का आयाेजन किया जाएगा। भैरव दरबार,रमक भैरव दरबार मे तीन दिवसीय भैरव महोत्सव का शुभारंभ संत भावनाथ महाराज ने दीप प्रज्वलित कर किया भैरव साधक पण्डित पहलाद ओझा’भैरु’ ने बताया कि आज विद्ववान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रों से भैरव पूजन श्रंगार किया गया तथा भैरव शतनाम पाठ खाशकर भैरव-भैरवी स्तोत्र पठन किया गया 

1008  दीप प्रजवल्लित किये गये 

भैरवाष्टमी के उपलक्ष्य में यहॉं स्थानीय गोकूल सर्किल स्थित सूरदासाणी बगेची में सूरदासाणी पुरोहित समाज द्वारा किए जा रहे पंच दिवसीय भैरवाष्टमी महोत्सव कार्यक्रम के चैथे दिन भैंरू नाथ के पुष्पों का भव्य श्रृंगार किया गया। आयोजक पं. अमित पुरोहित ने बताया कि भैरवाष्टमी महोत्सव के तीसरे दिन भैंरू जी के दीपमाला का कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमे 1008 दीप प्रजवल्लित किये गये। कार्यक्रम प्रवक्ता राजकुमार पुरोहित ने बताया कि पंच दिवसीय कार्यक्रम के तहत पॉंचवे व अंतिम दिन कोडमदेसर भैंरूनाथ जी के सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक 108 औषधीय द्रव्य, दूध, दही, गुलाब जल से रूद्राभिषेक किया जाएगा।

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भैरवाष्टमी या कालाष्टमी

कालाष्टमी का हिन्दू धर्म में बड़ा ही महत्त्वपूर्ण स्थान है। मार्गशीर्ष मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन भगवान शिव, भैरव रूप में प्रकट हुए थे। कालाष्टमी का व्रत इसी उपलक्ष्य में इस तिथि को किया जाता है। कालाष्टमी को ‘भैरवाष्टमी’ के नाम से भी जाना जाता है। भगवान भोलेनाथ के भैरव रूप के स्मरण मात्र से ही सभी प्रकार के पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं। भैरव की पूजा व उपासना से  मन इच्छा  फल मिलता है। अत: भैरव जी की पूजा-अर्चना करने तथा कालाष्टमी के दिन व्रत एवं षोड्षोपचार पूजन करना अत्यंत शुभ एवं फलदायक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन कालभैरव का दर्शन एवं पूजन मनवांछित फल प्रदान करता है।

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