बीकानेर

भुजिया कारीगर की हड़ताल,10 हज़ार भट्टियां बंद, रोजाना तीन करोड़ का नुकसान

बीकानेर. महंगाई सूचकांक के अनुसार भुजिया कारीगरों का मेहनताना बढ़ाने की मांग को लेकर भुजिया कारीगरों का धरना तीसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रही। शुक्रवार को भुजिया कारीगरों ने भुजिया की भटटी पर काम करना भी बंद कर दिया। कारीगरों की हड़ताल के चलते देश-विदेश में होने वाले भुजिया के निर्यात पर असर पड़ सकता है।

मेहनताना बढ़ाने की मांग

कारीगरों की मानें तो अकेले बीकानेर में प्रतिदिन भुजिया और इससे जुड़ी अन्य नमकीन का काम करीब तीन करोड़ रुपए का होता है। उधर भुजिया विक्रेताओं ने दावा किया है कि श्रमिकों की हड़ताल का उनके कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनके पास आगामी तीन माह के भुजिया का स्टॉक पड़ा है।

भुजिया कारीगर की हड़ताल,10 हज़ार भट्टियां बंद, रोजाना तीन करोड़ का नुकसान
भुजिया कारीगर की हड़ताल,10 हज़ार भट्टियां बंद, रोजाना तीन करोड़ का नुकसान

बीकानेर भुजिया नमकीन श्रमिक संघ के महामंत्री भागीरथ राजपुरोहित ने बताया कि श्रमिक संगठन और भुजिया निर्माताओं के बीच करीब दो वर्ष पूर्व तीन स्तरीय समझौता हुआ था, जिसमें महंगाई दर  के अनुसार भुजिया कारीगरों के मेहनताने में बढ़ोतरी करने का लिखित समझौता हुआ था। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी भुजिया श्रमिकों को उनकी मेहनत अनुसार पारिश्रमिक नहीं दिया जा रहा है।

ठप हो जाएगा कारोबार

श्रमिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारी गौरी शंकर व्यास ने बताया कि श्रमिक संगठन अपनी मांग पर अड़े हुए हैं, अगर उनकी मांग को जल्द ही पूरा नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में भुजिया के निर्यात का कारोबार ठप हो जाएगा। उन्होंने बताया कि अब भटिटयों पर काम करने वाले श्रमिकों के साथ-साथ मशीनों पर काम करने वाले भुजिया श्रमिकों ने भी हड़ताल में शामिल होने का निर्णय ले लिया है। ऐसे में अब मशीनों से भुजिया बनाना भी संभव नही होगा। ज्ञात हो कि बीकानेरी भुजिया देश में ही नहीं विदेशों में भी बड़ी मात्रा में पसंद किया जाता है। यहां से प्रतिदिन करीब तीन करोड़ रुपए के भुजिया की बिक्री देश-विदेश में होती है।

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