बीकानेर

बीकानेर जेल में बंद कैदी कर रहे है ये कारनामा, है हर कोई हैरान, पढ़े पूरी खबर !

बीकानेर।  केन्द्रीय कारागृह में सरकार की ओर से संचालित अाईटीआई कॉलेज में दसवीं पास सजायाफ्ता बंदी नियमानुसार एडमिशन लेकर मैकेनिक, फिटर और कम्प्यूटर ऑपरेटर एवं प्रोग्रामिंग की ट्रेनिंग हासिल रहे हैं। उद्देश्य यह है कि जेल से छूटने के बाद बंदियों को रोजगार मिले और वे अपना जीवन-यापन कर सकें। 

राज्य सरकार ने बंदियों को व्यवसायिक प्रशिक्षण देने के लिए अक्टूबर, 12 में बीकानेर केन्द्रीय कारागृह में आईटीआई कॉलेज खोला। वर्तमान में 33 सजायाफ्ता बंदी आईटीआई कर रहे हैं जिनमें से चार ने फिटर, 11 ने मैकेनिक डीजल इंजन और 19 ने कम्प्यूटर ऑपरेटर एवं प्रोग्रामिंग में एडमिशन ले रखा है। कॉलेज में मैकेनिक और फिटर संकाय पहले से हैं, पिछले साल कम्प्यूटर भी शुरू कर दिया गया। मैकेनिक और कम्प्यूटर की ट्रेनिंग एक साल और फिटर की ट्रेनिंग दो साल की है।

जेल आईटीआई कॉलेज में ट्रेनिंग से बंदियों को रोजगार का जरिया मिल रहा है और रिहा होने के बाद वे रोजी-रोटी कमा रहे हैं। रामपुरा बस्ती की गली नंबर 18 में रहने वाला बजरंगसिंह भी ऐसा ही एक शख्स हैं। उसे एनडीपीएस एक्ट में 10 साल की सजा हुई। 2012 से अगस्त 2016 तक जेल में रहा। इस दौरान उसने पहले मैकेनिक और फिर फिटर की ट्रेनिंग ली। हाईकोर्ट से बरी होने के बाद अब गाड़ियों की मेंटेनेंस कर परिवार चला रहा है। 

पॉजिटिव मानसिकता से लेते हैं ट्रेनिंग

जेल आईटीआई अधीक्षक हुकुमसिंह राठौड़ बताते हैं कि आईटीआई में एडमिशन लेने वाले बंदी भले ही गंभीर अपराध की सजा भुगत रहे हों, लेकिन ज्यादातर अपनी ट्रेनिंग पॉजिटिव मानसिकता के साथ ही करते हैं। गिने-चुने बंदी ही ऐसे होते हैं जो बैरक से बाहर रहकर समय बिताने के लिए आईटीआई में एडमिशन ले लेते हैं। आईटीआई में एडमिशन की फीस 24,000 रुपए है जो सरकार देती है। जेल आईटीआई में पांच प्रशिक्षक हैं जो बंदियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। जेल में कॉलेज का संचालन कौशल नियोजन एवं उद्यमिता विभाग की ओर से राज्य व्यवसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) के तहत किया जाता है। 

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