बीकानेर

पेड़ के नीचे चल रहा बीकानेर का ये सरकारी स्कुल, ज़िम्मेवारों ने दी ये सफाई !

बीकानेर। जहाँ एक और प्रदेश सरकार बड़े-बड़े होर्डिंग पर शिक्षा में सुधार के दावे कर रही है। दूसरी और उसकी असलियत कुछ और ही सामने आ रही है।  रोजाना अख़बार के पहले पन्ने पर छपने वाले विज्ञापनों में किये जाने वाले सरकारी दावों की पोल खोलता बीकानेर का ये सरकारी स्कुल एक गवाह रूप में प्रत्यक्ष है।

यहां पेड़ की छांव व पटरियों पर चलती रेलगाड़ी की आवाज के बीच ए से एप्पल, ई से एलीफेंट पढऩे को मजबूर है 30 से अधिक बच्चे। यह सारा नजारा बुधवार को रामपुरा बस्ती स्थित ख्वाजानगर में पेड़ की छांव के नीचे चल रही राजस्थान प्राथमिक संस्कृत विद्यालय का। जिसमें इन छात्र-छात्राओं के लिए न तो स्कूल भवन है और न ही मिड डे मील का खाना, पीने का पानी।

इन सभी असुविधाओं के चलते भी यह विद्यार्थी नियमित पढ़ाई कर रहे हैं। यह स्कूल यहां 22  नवंबर 2017 से चल रही है, लेकिन आठ माह बाद भी सरकार यहां विद्यार्थियों की बैठक व्यवस्था की, न ही मिड डे मील की। जबकि सरकार की ओर से दावा किया जाता है कि सभी स्कूलों में अध्यापक लगा दिए है।

हर बच्चे को दूध, मिड डे मील का खाना मिलता है। वहीं इस सरकारी स्कूल के बच्चे किसी भी तरह की सुविधा नहीं होने से सरकारी दावों की पोल खोल रही है। वहीं इस स्कूल में प्रतिनियुक्ति पर 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक लगाया गया है, जो सुबह से दोपहर तक विद्यार्थियों को पढ़ाते है।

शिक्षक घनश्याम सिहाग ने बताया कि स्कूल की हर माह की जानकारी डीईओ चूरू दे चुके है। इससे पहले यह स्कूल बारहगुवाड़ से रामपुरा बस्ती में स्थानांतरित था। स्कूल के लिए वार्ड पार्षद व मोहल्लेवासियों की ओर से एक कमरे दिया गया है, लेकिन कमरा छोटा होने से पेड़ के नीचे कक्षा लगा रहे है।

एक घंटे खाना खाने घर जाते है विद्यार्थी

पांचवीं तक के विद्यार्थी दोपहर में 11 से 12  बजे तक खाना खाने घर जाते है। स्कूल में मिड डे मील की व्यवस्था नहीं होने से यह विद्यार्थी खाने से भी वंचित है। घर खाना खाने के बाद वापस स्कूल आते है। अभिभावक मन्ने खां ने बताया कि मोहल्ले के कई बच्चे एेसे जो रेलवे लाइन पार कर दो किलोमीटर दूर पढऩे जाते है। अगर यह स्कूल उच्च प्राथमिक हो जाए तो मोहल्ले के ओर भी बच्चे पढ़ सकेंगे।

जमीन मिलना मुश्किल

शहर में जमीन मिलना काफी मुश्किल हो गया है। इसके लिए बीकानेर आकर स्कूल के लिए जमीन देखेंगे। साथ ही नई भर्ती में नियमित रूप से अध्यापक को लगाया जाएगा। – बलवानसिंह, संभागीय शिक्षा अधिकारी, संस्कृत शिक्षा

स्कूल के लिए जगह देख रहे है। उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है। स्कूल भवन के लिए एक समिति बनाकर जमीन देखी जाएगी।– रुकमानंद शर्मा,प्रिंसिपल, राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय

यह स्कूल अभी ही खुली है। संस्कृत विभाग की ओर से अभी तक कोई जानकारी नहीं है। एक अध्यापक की ओर से मिड डे मील चालू करवाने की बात कही लेकिन विभाग के उच्चाधिकारियों के माध्यम से स्कूल में छात्र संख्या व स्कूल की जानकारी देने के बाद मिड डे मील शुरू किया जाएगा। -माशंकर किराडू, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक बीकानेर

 

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