बीकानेर

फिर से दौड़ेगी धावक ज्योति, धरती के भगवान ने दी उम्मीदों की नई रोशनी

बीकानेर। राज्य स्तर पर एथेलेक्टिक (दौड़) में अच्छे-अच्छे धावकों को छकाने वाली ज्योती अब फिर से दौड़ सकेगी। दौडऩे के दौरान रीढ़ की हड्डी में सर्वाइकल दर्द शुरू हुआ। इसके बाद धीरे-धीरे हाथ और फिर एक पैर सुन्न होता चला गया। चिकित्सकों को दिखाया लेकिन आराम नहीं आया वह अब फिर से दौडऩे की उम्मीद तक छोड़ चुकी थी।

पीबीएम के चिकित्सकों ने उसकी रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन कर उसके फिर दौडऩे की उम्मीदों को रोशनी प्रदान की है। ज्योति का सरकार की भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत नि:शुल्क ऑपरेशन किया गया है।

सर्वाइकल की परेशानी से जूझ रही थी 

लूणकरणसर के खोखराना गांव की 15 वर्षीय ज्योति गोदारा का ऑपरेशन बुधवार को पीबीएम अस्पताल के चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक किया। ज्योति के रीढ़ की हड्डी की गली हुई सातवीं सर्वाइकल को निकाल कर केज इम्प्लांट किया गया और मेरू कैनाल के अंदर तथा बाहर फैली गांठ को निकाला गया।

न्यूरो सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश सोढ़ी के नेतृत्व वाले चिकित्सक दल में डॉ. कपिल पारीक, डॉ. साधना जैन व डॉ. संगीता सेठिया ऑपरेशन टीम में शामिल थे। सीएमएचओ डॉ. दिनेश चौधरी ने बताया कि ज्योति का ऑपरेशन भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत किया गया है । जिले में पीबीएम एवं जिला अस्पताल सहित नौ निजी व 15 सरकारी अस्पतालों के मार्फत बीएसबीवाई का लाभ दिया जा रहा है।

उम्मीद छोड़  चुके थे 

ज्योति की मां इंदिरा देवी बताती है कि वह खेलकूद और पढऩे में होशियार है। बड़ी होकर एथेलेटिक्स में बुलंदिया छूना चाहती थी। करीब एक माह पहले ज्योति का एक हाथ सुन्न रहने लगा फिर एक पैर । पूरा परिवार ज्योति के फिर से चलने की उम्मीद खो चुके थे । सीएचसी लूणकरणसर दिखाने पर उन्होंने पीबीएम के न्यूरो सर्जरी विभाग को रेफर कर दिया । ऑपरेशन के बाद चिकित्सकों ने बताया कि ज्योति कुछ ही महीनों में फिर से दौडऩे लगेगी ।

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