अजब गजब

रोटी, कपड़ा, मकान के साथ ‘ पाटा संस्कृति ‘ भी अहम् हिस्सा है, इनके जीवन का !

 राजस्थान में करीब पाँच सौ वर्षों से अधिक प्राचीन एवं दीर्घ कालावधि तक परकोटे में सिमटे रहे ऐतिहासिक एवं पारम्परिक शहर बीकानेर की अपनी विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान है। जातीय आधार पर विभिन्न चौकों/गुवाडों (मौहल्लों) में आबाद इस परकोटायुक्त शहर में आकर्षण का केन्द्र है

बीकानेर के लोग खासकर परकोटे की भीतर के लोग , रोटी कपडा और मकान की तरह , चौक में लगे पाटों को  भी अपने जीवन की  अहम्  जरुरत मानते है ! पाटा संस्कृति को बीकानेर शहर की विरासत कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी और यह संस्कृति यहां के बाशिन्दों की समृध्द सोच और सभी तरह के विषयों में गहरी पकड़ को साबित करती है।

 

 

पाटा के मायने है तख्ते और दिन में इन तख्तों पर जो चर्चाएं होती हैं उसमें बीकानेर के किसी मोह्हले से लेकर अमेरिका तक  चर्चा की जाती है और उसमें भी बहस काफी मुखर मुकाम पर पहुंची हुई होती है। इस चर्चा में 18-20 वर्ष का युवा जहां भागीदार रहता है तो 80-90 वर्ष के बुजुर्ग भी उसी मुस्तैदी से इसमें भाग लेते हैं। अमूमन हर हर उम्र के लोग पाटे पर विराजमान नज़र आते है

जब भी कोई त्यौहार हो या पुष्करणा सावा हो हर तरह की चर्चा शामिल होती है ,जब होली के दिन आते हैं इन्हीं पाटों पर दिन ढलने के साथ ही रम्मत गायन की तैयारियां देखने को मिलती है और बीकानेर की रम्मतें यहां की उस मस्ती को उजागर करती है जो यहां के बाशिन्दों की रग-रग में समाहित है।

 

–  बीकानेर पाटा संस्कृति से जुड़े हास्य व्यंग :- 

 

*हथाई*

बीकानेर मस्तानों का शहर है यहां सब मिलजुल कर रहते हैआज भी इटँरनेट के जमाने मे लोग यहां कि पाटा संस्कृति को पसन्द करते है, क्योकिं आज भी यहां होती है ” हथाई ” चूनगरान मौहल्ला से चीन तक ओर बिस्सों के चौकँ से बेल्जियम तक सब बातें होती है इन पाटों पर बड़े बुजुर्ग ओर युवा पीढी सभी एक ही जाजम पर बैठ कर सुख दुख की करते है कल रात हमारे संवादाता बाबूड़ी टारजन ने शहर मे भ्रमण किया ओर हमारे लिये लाये ताजा हथाई

 

मोहता चौक की हथाई

 

पाटे पर बैठे सुंडा महाराज ने अपने साथियों से कहा” ई नवाज शरिफ रो तो हियो ही फुट ग्यो घर मे जवान छोरी बैठी है, कोई सगाई पताई करां जको तो नही! भारत सुं कुचरणी करे कि कशमीर दे दो अब मागयां कोई चीज मिले क्या ? 

दाऊलाल जी व्यास”‘हां बात तो सही है माग्यां मिले तो म्हारै सागे रेलवे मे असगर काम करे बि रो छौरो कुवारों है हुं भी नवाज शरिफ सुं बे री छोरी मागँ लीस असगर रै छौरे वास्ते। 

घीसा महाराज “‘अरे हूं ओबामा ने आ बात पैलीज कैई दी कि तुं इरो हिमायती ना बणीं ऐरा लखण चौखा कायनी है,बाद मे फोन कर कैवे महाराज थै सहीं कैंवता। 

हेमू रंगा”‘ आॅपां तो एक बात कैंवा जीवो ओर जीवण दो, पर आ बात ऐ रे समझ मे आवै कायनी अब क्या है कि मोदी बापड़ो धीरज कितीक राखै ऐने अबकी बार परचो देणों ही पड़सी!आ मनै दिखै।

 भैरजी “‘अब मोदी रो नोट बँदी ओर काळो धन रो मैटर खत्म हो जावै तो, एकर बीकानेर बुला लेवां ओर अठै ही आपां सगळा समझा देवां कि अब ज्यादा धीरज राखणों ठीक कायनी अबकी बार नकी करो ई पार या बी पार 

सुंडा महाराज ” अरै भैरजी आ गैलाई ना करया अबार मोदी ने छेड़ो ना अबार भौत ही बडे मिशन ने अंजाम देसी मौदी हेमू रंगा ” अरै ओ रात ने काळो चश्मो कुणँ लगार आयो है?

भैरजी ” संजय है पारीक चौक आळो!
सुडां महाराज ” आव रै छैल भंवर आजकल दिखै ही कायनी?
संजय”क्या करूं महाराज काम धन्धां घणां है! टैम ही कोनी मिले।
भैरजी “‘मरसो क्या होय धन हाय धन कर परा ओ देख ले एक मिनट मे बाडें कडवा दियो मोदी जी धन ने
सुडां महाराज “‘अरै बाबूड़ी चाय तो मगंवा ले भायला कई दिना बाद आयो है म्हारो सागिर्दी
मस्त शहर है हमारा बिकाणा यहां की संस्कृति ओर यहां जैसे सरल स्वभाव के लोग आपको कहीं भी नही मिलेगें ये मेरा दावा है

हास्य व्यंग :

कुचरणी फेसबुक पेज से

 

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