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बीकानेर, सड़क हादसों में 7 लोगों की मौत के बाद से गांवों में पसरा सन्नाटा

परसों देर रात दो अलग - २ जगहों पर हुए सड़क हादसों में सात लोगों की जान चली गयी और करीब 2 दर्जन अधिक लोग घायल हो गए

बीकानेर। परसों देर रात दो अलग – २ जगहों पर हुए सड़क हादसों में सात लोगों की जान चली गयी और करीब 2 दर्जन अधिक लोग घायल हो गए। हादसे की सुचना मिलते इन परिवारों में कोहराम सा मच गया। पहला हादसा श्रीडूंगरगढ़ तहसील के बिग्गा गांव के पास शादी से लौट रही बारात की मिनी बस का हुआ जिसमे 5 लोगों की मौत 12 जने गंभीर रूप से घायल हो गए। ये सभी बीनादेसर गांव के रहने वाले थे जो मूंडसर से वापस अपने गांव लौट रहे थे।

वहीँ दूसरा हादसा पिकअप और टेम्पों के बीच नोखा तहसील में जसरासर गांव के पास हुआ जिसमे 2 महिलाओं की मौत गयी और करीब 9 लोग घायल हो गए। टेम्पों में सवार सभी जसरासर से कातर की और जा रहे थे तभी सामने आ रही पिकप ने टेम्पों को टक्कर मार दी। इन दोनों हादसों के बाद से  कातर और बीनादेसर गांव में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ है।  



हादसे से शोक की लहर

श्रीडूंगरगढ़। बीकानेर जयपुर हाइवे बिग्गा गांव नज़दीक परसों देर रात हुए इस हादसें के बाद से बीनादेसर गांव में सन्नाटा पसरा है। जहाँ एक और शादी खुशियां का माहौल था वो अब मातम में बदल चूका है। मंगल गीतों की बजाय परिवारों से रोने आवाज़ें आ रही है।गांव में पांच लोगों की मौतों के बाद पुरे गांव में सन्नाटा पसरा है।



इस दर्दनाक हादसे में किसी ने बेटा तो किसी ने भाई, तो किसी ने पिता और किसी ने पति को खो  दिया है । बताया जा है हादसें की शिकार इस मिनी बस के मालिक की ये पहली ही बुकिंग थी जो उसके और बाकि चार लोगों के लिए आखरी साबित हुई। हादसें के बाद गंभीर रूप घायल हुए कुछ लोग अभी भी पीबीएम अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे है उनके ऊपर से अभी खतरा टला नहीं है। किसे पता था हसीं ख़ुशी विदा हुए लोग इस तरह लौटेंगे।         



जसरासर. यहां सड़क हादसे के बाद से सन्नाटा पसरा हुआ है। शनिवार की रात महेंद्र गवारिया के परिवार पर काल बनकर आई जिसमे एक ही परिवार की देराणी-जेठानी की मौत के साथ ही नौ जने घायल हुए जिनमे से दो जयपुर रैफर किए हुए हैं आधा दर्जन बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भर्ती है।

जानकारी के अनुसार पांच माह पूर्व महेंद्र गवारिया अपने परिवार व रिश्तेदारो के साथ कातर बाजार में दुकान किराए लेकर रहना शुरू किया। सभी सदस्य रोजाना सुबह यहां से कातर क्षेत्र के गांवो में निकलते गांवो में घूम कर चूड़ी आदि बेचकर रात को कातर आ जाते थे। शनिवार रात की भी महेंद्र अपने परिवार व रिश्तेदार के साथ कातर की तरफ आ रहे थे रात को हादसा हुआ। कातर में जिस मार्केट में इन गवारिया ने दुकान किराए ले रखी थी वो बन्द रही। माहौल गमगीन रहा व दिनभर अनहोनी की चर्चा चलती रही।



सरकार प्रशासन की तरह कोई नहीं आया 

हादसें के बाद से अभी तक सरकार या प्रसाशन में से किसी ने भी घायलों मृतकों के परिवारों की सुध नहीं ली है. हादसें को आज तीसरा दिन है मुवावजा तो दूर की बात है सरकारी नुमाइंदे या जनप्रतिनिधि कुशलक्षेम तक पूछने नहीं आये. हालंकि कई स्वयंसेवी सामाजिक संस्थाओं ने हादसे के बाद घायलों को संभाला मगर सरकार की तरफ से किसी ने आना गवारा नहीं समझा। इसमें सरकारी तंत्र की लापरवाही साफ-२ नज़र आ रही है    

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