अजब गजबबीकानेर

अनूठा है मां नागणेचीजी का यह प्राचीन मंदिर, जहां आरती के बाद लग जाते है ताले

अनूठा है मां नागणेचीजी का यह प्राचीन मंदिर, जहां आरती के बाद लग जाते है ताले

बीकानेर।  जोधपुर के पूर्व महाराजा राव जोधा के पुत्र राव बीका ने संवत 1545 में बीकानेर नगर की स्थापना की। वर्तमान में जहां नगर सेठ लक्ष्मीनाथ का मंदिर है, उस क्षेत्र में राव बीका ने बीकानेर के पहले गढ़ की नींव रखी। लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर के ठीक सामने मां चामुण्डा और नागणेचीजी का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में संगमरमर की बंगली में मां नागणेचीजी की चांदी से निर्मित मूर्ति विराजमान है। यह स्थान जूनाकोट के नाम से भी प्रसिद्ध है।


रोजाना ऐसा होता है

इस मंदिर की विशेषता है कि यहां रोजाना आरती और पूजन के बाद निज मंदिर के मुख्य गेट को बंद कर दिया जाता है। जाली वाले इस गेट में श्रद्धालु गेट के बाहर से ही इस मूर्ति का दर्शन करते है। मंदिर के अंदर श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति नहीं है। मंदिर पुजारी भी आरती-पूजन के बाद निज मंदिर से बाहर आ जाते है।


पुजारी ने बताया कि रियासतकाल से यही व्यवस्था चली आ रही है। उस दौर में संभवतया मूर्ति की सुरक्षा को लेकर यह व्यवस्था की गई थी, जो आज भी चल रही है। पुजारी के अनुसार प्रतिवर्ष नवरात्रा के अवसर पर मंदिर परिसर में हवन, पूजन, पाठ आदि धार्मिक अनुष्ठान होते हैं।


श्रद्धालुओं में विशेष श्रद्धा

मंदिर पुजारी श्याम सुन्दर देरासरी ने बताया कि रियासतकाल से मां नागणेचीजी का यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। रोजाना यहां बड़ी संख्या में लोग दर्शन-पूजन को आते है। मंदिर के गेट पर ताला ही लगा रहता है। निज मंदिर में हर किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं है। पुजारी भी आरती और पूजन के बाद मंदिर से बाहर रहता है।

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