अजब गजबधर्मबीकानेर

यहाँ रेतीले धोरा के बीच बिराजते है बालाजी महाराज !

बजरंग धोरा बीकानेर 

यहाँ रेतीले धोरों की बीच बिराजते है बालाजी महाराज,बीकानेर शहर से बाहर पुगल रोड पर स्थित है ये भव्य मंदिर,यहाँ पहुचने के लिए पहले रेतीले धोरों से गुजरना पड़ता था इसलिए इस स्थान का नाम बजरंग धोरा पड़ गया। 

बीकानेर में बालाजी का एक अनोखा मंदिर है जो बजरंग धोरे के नाम से प्रसिद है |बालाजी महाराज के इस अदभुत मंदिर के प्रति स्थानीय निवासियों में गहरी आस्था है | इस मन्दिर के चारों ओर दूर दूर तक आबादी नजर नहीं आती है|चारों और और रेतीले टिब्बे नज़र आते है | नज़र आती है तो चारों तरफ रेत ही रेत है मंगलवार और शनिवार को तो यहां काफी रेलमपेल रहती है। क्योकि इन दिनों में बाबा की विशेष जोत एवं सुन्दरकाण्ड के पाठों का आयोजन होता रहता है|

चैत्र पूर्णिमा को विशेष शृंगार के साथ बूंदी महाप्रसाद का आयोजन होता है जबकि शरद् पूर्णिमा को मध्य रात्रि में विशेष आरती के बाद खीर प्रसाद का वितरण किया जाता है। वसंत पंचमी व गुरु पूर्णिमा को भजन संध्या के साथ प्रसाद वितरण होता है। इन अवसरों में पर यहां भक्तों की भीड़ जुटती है। एक ज़माने में कच्चा मार्ग था अब तो यहां पहुंचने के लिए पक्की सड़क भी बन चुकी है। यहाँ पहुचने के लिए पहले रेतीले धोरों से गुजरना पड़ता था इसलिए इस स्थान का नाम बजरंग धोरा पड़ गया। 

इस मन्दिर की स्थापना के संबंध में कहा जाता है कि यहां पर आध्यात्मिक खोज में निकले बाबा रामचंद्र जी दाधीच ने साधना की थी। इस मन्दिर की स्थापना बसंत पंचमी (शनिवार) संवत् 2016 (ईस्वी सन 1961) को बाबा रामचंद्र जी महाराज ने की थी। इससे पूर्व रामचंद्र जी दाधीच बीकानेर से करीब 80 किमी. दूर पूगल गांव में रहते थे। किसी कारणवश पूगल त्यागकर वे बीकानेर आ गए और यहां एक हनुमानजी का ​मन्दिर बनवाया।

वर्तमान में माहेश्वरी सदन के पास यह मन्दिर स्थित है। बाद में वे उस स्थान को छोड़कर बीकानेर से उत्तर की और स्थित धोरों में जहां अभी मन्दिर है वहां छोटा सा मन्दिर बनाकर रहने लगे। 23 वर्ष तक इस मंदिर परिसर में बाबा जी रहे तथा यहीं उनका देहांत हुआ।

यह दक्षिणमुखी मंदिर है तथा बाला जी के दाएं हाथ में संजीवनी बूटी का पर्वत लिए मूर्ति है तथा परंपरागत कपड़े की अंगी सप्ताहवार बदली जाती है। भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर यहां सुंदर कांड व सवा मणि का कार्यक्रम करवाते है। मन्दिर के दीवारों पर अंकित चित्रों में पूरी रामायण का वर्णन है।   

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