बीकानेरबीकानेर संभाग

बीकानेर – की – पांच – बेटियों – ने – दिया – माँ – की – अर्थी – को – कांधा !

 बीकानेर। जो लोग बेटे और बेटी में फर्क समझते है उनके लिए एक मिसाल पेश की  है गंगाशहर (बीकानेर) की इन बेटियों ने, गंगाशहर के गांधी चौक में निवास कर रहे अनोप चंद भंसाली की पत्नी का देहावसान हो गया। मां के देहांत के बाद उनकी बेटियों अमिता सुराणा, पूजा छलाणी, प्रियंका, दिव्या, शिखा के साथ ही उनकी चचेरी बहने ज्योति, दीपिका ओर काेमल ने भी अंतिम यात्रा में शामिल होकर अर्थी को कांधा दिया और अंतिम संस्कार किया।

रूढ़िवादी परम्परा को तोड़ कर अनूठी मिसाल पेश की

हमें बीकानेर की इन बेटियों के जज़्बे को सलाम करना चाहिए जो इन्होने पुरानी रूढ़िवादी परम्परा को तोड़ दिया, जिनकी कंधे पर माता की अंतिम यात्रा निकली। इन बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि बेटे व बेटी में अंतर नहीं होता है। मां-बाप के लिए बेटियां भी इतने मूल्यावान है, जितने बेटे होते है। समाज में बेटे को हाथों की माता-पिता को मोक्ष मिलने की जो बात कही जाती है वह गलत है। बीकानेर की इन बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि इच्छा शक्ति हो तो गलत नियमों को भी तोड़ा जा सकता है। बेटियों के इस काम को देख सभी की आंखे नम हो गई। बेटियों की इस पहल को मानमल सोनी, मनोहर दुगड़, महेंद्र व्यास, पंकज आंचलिया, श्याम भादू, हरिओम जोशी, धीरज राजपुरोहित आदि ने बेटियों के इस काम को प्रेरक बताया। 

 

 

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