बीकानेर

जानें बीकानेर से जुड़े भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के अनसुने किस्से !

बीकानेर। बात सन 1982 की है, जब भाजपा जिला संगठन के बुलाने पर अटल बिहारी वाजपेयी बीकानेर आए थे। उस समय वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। भाजपा की स्थापना के बाद इसके प्रसार को लेकर देशव्यापी दौरे के तहत बीकानेर आए और इस दौरान बीकानेर में आयोजित सम्मेलन में वाजपेयी ने आमसभा को संबोधित किया था। उस समय वरिष्ठ नेता ओम आचार्य के पास भाजपा जिला अध्यक्ष का दायित्व था। वहीं दिवंगत कृपाचंद सुराणा कोषाध्यक्ष हुआ करते थे। 18 फरवरी 1982 को फोर्ट स्कूल के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में उस समय भाजपा से जुड़े कई लोगों ने हिस्सा लिया था। 

हास्य विनोद का दिखा नजारा

अपने कार्यकर्ताओं के साथ हास्य विनोद कर उनसे आत्मीय रहते वाजपेयी को जब कार्यक्रम के पश्चात संगठन को सहयोग के लिए बीकानेर से संगठन स्तर पर जुटाई गई सहयोग राशि 1.51,000 रूपये की थैली कोषाध्यक्ष सुराणा ने भेंट की थी। थैली लेने के साथ ही तुरंत वाजपेयी ने सुराणा से कहा, थैली खाली तो नहीं है। दरअसल थैली में कुछ रूपयों के अलावा चेक भी था। पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के निधन से जहां समूचा देश दुखी है, वहीं बीकानेर भी गमगीन नजर आया। अपने जीवन में वाजपेयी चार बार बीकानेर आए। बीकानेर में भाजपा को स्थापित करने के लिए भी इस भारत रत्न का बड़ा योगदान था।

चार बार बीकानेर आए

वर्ष 2003  में यहां नन्दलाल व्यास चुनाव लड़ रहे थे। उन्होंने अपने भाषण में कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए एक कहानी सुनाई और बताया कि किस तरह से माहौल बना दिया जाता है। एक नकली चवन्नी चलाने के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने जिस अंदाज में ‘चल गई… चल गई… कहा, वो आज भी लोगों को याद है। इस भाषण के बाद बीकानेर में भाजपा का माहौल बना और पहली बार भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी ने बीकानेर में जीत दर्ज की। माना जाता है कि इसके बाद ही बीकानेर शहर की सीट पर भाजपा का जनाधार बढ़ा। 

बीकानेर में चुनावी सभाओं में जब भी वाजपेयी की आवश्यकता होती थी तो वे जरुर आते थे। जनसंघ के दौरान भी वाजपेयी बीकानेर आए थे। इसके बाद भाजपा का गठन होने के बाद चुनावी सभाओं में भी उनका आना होता था। चुनावी मौसम में उनकी एक बड़ी सभा वर्ष 2003 के विधानसभा चुनावों के दौरान राजकीय डॉ. करणीसिंह स्टेडियम में आयोजित की गई थी।

इस सभा में बीकानेर जिले की सभी विधानसभाओं के प्रत्याशी मौजूद थे। उस दौरान कोलायत के अलावा जिले में कहीं पर भी भाजपा का कमल नहीं खिलता था। इस सभा में अन्य नेताओं के भाषणों के बाद वाजपेयी को माइक पर भाषण देने के लिए बुलाया गया था। 

‘अटल-आडवाणी कमल निशान मांग रहा है हिन्दुस्तान’

अपने निर्धारित समय के एक घंटे की देरी से पहुंचे वाजपेयी जैसे ही मंच पर आए तो लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उस दौरान एक ही नारा चलता था ‘अटल-आडवाणी कमल निशान मांग रहा है हिन्दुस्तान’। इस नारे को सुनकर वाजपेयी ने हाथ हिलाकर जनता का अभिनंदन किया। इस सभा में वाजपेयी ने भाजपा प्रत्याशियों को जिताने की अपील की थी। इस दौरान उन्होंने करीब पौने घंटे तक भाषण दिया था। उनका भाषण सुनने के लिए न केवल भाजपा के कार्यकर्ता ही आते थे, बल्कि अन्य दलों के नेता भी भाषण सुनने के लिए आते थे।

करणीसिंह स्टेडियम में जब उनका भाषण चल रहा था तो बाहर सड़क पर भी लोग खड़े उनके भाषण को सुन रहे थे। इसी भाषण के दौरान उन्होंने जानबूझकर भाजपा प्रत्याशी नंदलाल व्यास का नाम नहीं लिया था। गलत नाम बोलकर जनता के मुंह से ही प्रत्याशी का सही नाम बुलवाया था।

बृजमोहन आचार्य.बीकानेर

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