बीकानेर

बीकानेरी भुजिया रसगुल्ले के शौकीन थे अटल जी, पांच बार आ चुके थे बीकानेर !

बीकानेर। जनसंघ से लेकर जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी में एक सामान्य कार्यकर्ता से लेकर देश के प्रधानमंत्री बनने तक का सफर तय करने वाले अटल बिहारी वाजपेयी को बीकानेर ने भी बहुत नजदीक से देखा है।वाजपेयी पांच बार बीकानेर आ चुके हैं। उनके दुनिया से रुखसत होने के बाद उनसे जुड़ी यादों का पिटारा खुलते ही बीकानेर में जनसंघ के नेता रहे ओम आचार्य भावुक हो उठते हैं।  

आज से करीब 65 साल पहले यानि साल 1953। उन दिनों अटलजी ने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरूआत की ही थी। उस वक्त बीकानेर के दांती बाजार में वाजपेयी की एक सभा हुई थी। यह पहली बार उनका बीकानेर आना था। इसके बाद वाजपेयी चार बार और बीकानेर आए। सन 1971, 1982, 1994 और 2003 में प्रधानमंत्री रहने के दौरान।

जनसंघ के शुरूआती दौर और फिर भाजपा से जुड़े, दो बार विधानसभा और एक बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके वरिष्ठ नेता ओम आचार्य बताते हैं कि बीकानेर से उनका हमेशा से जुड़ाव रहा। एक सामान्य कार्यकर्ता से प्रधानमंत्री बनने तक का सफर तय करने वाले वाजपेयी ने खुद के व्यक्तित्व के दम पर देश और पार्टी को नई ऊंचाइयां दी।

भुजिया रसगुल्ला रहता था याद

आचार्य बताते है कि बीकानेर से एक संघी कार्यकर्ता मदन भारती का जब भी दिल्ली में वाजपेयी से मिलने जाना होता था तो वे तपाक से पूछ उठते कि बीकानेर से आये हो भुजिया-रसगुल्ला लाये हो क्या? कोई बीकानेर से जाता था तो उनसे भी वाजपेयी यही पूछा करते थे।

देश के प्रधानमंत्री के साथ एक कवि रहे वाजपेयी की स्व रचित पंक्तियां…कवि आज सुना वह गान रे…..आज खुद उन पर सटीक बैठ रही है।

हम ऊब चुके इस जीवन से, 
अब तो विस्फोट मचा देंगे। 
हम धू – धू जलते अंगारे हैं, 
अब तो कुछ कर दिखला देंगे।

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