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दुल्हन के पिता ने दहेज में दिए 10 करोड़ रुपए, दूल्हे ने लेने से किया इनकार

शादी में प्रतिमा के पिता ने दूल्हे को 10 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी के दस्तावेज अौर 30 लाख रुपए नकद दहेज के रूप में दिए, लेकिन दूल्हे ने लेने से मना कर दिया।

भोपाल। छतरपुर जिले की घुवारा की रहने वाली प्रतिमा राणा ने 20 फरवरी को रुड़की में शेर सिंह राणा के साथ सात फेरे लिए। शादी में प्रतिमा के पिता ने दूल्हे को 10 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी के दस्तावेज अौर 30 लाख रुपए नकद दहेज के रूप में दिए, लेकिन दूल्हे ने लेने से मना कर दिया। दूल्हे ने चांदी का एक सिक्का लेकर दहेज की रस्म अदायगी की। बता दें कि शेर सिंह राणा फूलनदेवी की हत्या करने के आरोप में जेल जा चुके हैं। .

ऐसे जुड़ा रिश्ता

पॉलीटिकल साइंस से एमए दुल्हन प्रतिमा राणा की चाची संध्या राजीव बुंदेला छतरपुर घुवारा से नगर पालिका अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि वह क्षत्रिय महासभा से जुड़ी हैं। कुछ समय पहले ग्वालियर में क्षत्रिय महासभा का एक कार्यक्रम हुआ था। इसमें वे शेरसिंह राणा से मिली थीं। यहां संध्या ने राणा को अपनी भतीजी प्रतिमा के लिए पसंद किया था। प्रतिमा के पिता राणा प्रताप सिंह बुंदेला राजनीति के साथ ही कांट्रेक्टर हैं।

जमानत पर रिहा है शेर सिंह राणा

शेर सिंह राणा ने 25 जुलाई 2001 को समाजवादी पार्टी की सांसद फूलन देवी की दिल्ली स्थित सरकारी आवास से निकलते वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली कोर्ट ने 2014 में फूलन देवी हत्याकांड का दोषी मानते हुए शेरसिंह राणा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसी अदालत ने शेरसिंह राणा को 2017 में जमानत दी थी। 

पृथ्वीराज चौहान का मंदिर बनवाया

उत्तराखंड के रुड़की में जन्मे शेरसिंह राणा उस समय चर्चा में आए थे, जब वे सम्राट पृथ्वीराज चौहान की अफगानिस्तान के गजनी में स्थित समाधि स्थल से वहां की मिट्टी भारत ले आए थे। बता दें इस दौरान वह फूलन देवी की हत्या के मामले में तिहाड़ जेल में बंद थे। 17 फरवरी 2004 को जेल से फरार होने के बाद वे नेपाल बांग्लादेश व दुबई के रस्ते से होते हुए अफगानिस्तान पहुंचे थे। 2005 में सम्राट पृथ्वीराज चौहान की समाधि की मिट्टी को वे भारत लेकर आए। उन्होंने अपनी इस पूरी घटना का वीडियो भी बनाया था, जिसके बाद राणा ने अपनी मां की मदद से, गाजियाबाद के पिलखुआ में पृथ्वीराज चौहान का मंदिर बनवाया था। इस मंदिर में आज भी पृथ्वीराज चौहान की समाधि की मिट्टी रखी हुई हैं।

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