धर्म

बीकानेर/गंगाशहर : ” महावीरमय हुई धर्मनगरी बीकानेर ” धूम-धाम से निकली भगवान महावीर की शोभा-यात्रा !

 बीकानेर/गंगाशहर 


गंगाशहर। भगवान महावीर की क्रान्ति खण्डन पर नहीं मण्डन पर आधारित थी। उन्होंने हृदय परिवर्तन द्वारा क्रान्ति की, प्रलोभन या बल प्रयोग से नहीं की। यह बात भगवान महावीर के 2616 वें जन्म कल्याणक महोत्सव के मुख्य समारोह का सम्बोधित करते हुए मुनिश्री पीयूष कुमार ने कही।

यह समारोह सम्पूर्ण जैन समाज की प्रतिनिधि संस्था जैन महासभा के द्वारा गौड़ी पार्श्वनाथ जैन मंन्दिर में आयोजित किया गया था।

तेरापंथ कन्या मण्डल द्वारा संगीतमय अभिनय की प्रस्तुति पंच कल्याणक आकर्षण का केन्द्र रही। भगवान महावीर का गर्भच्यवन, जन्म, दीक्षा, केवलज्ञान व निवार्ण कल्याणकों के मनोरम दृश्य प्रस्तुत किए। समारोह को सम्बोधित करते हुए जैन लूणकरण छाजेड़ ने कहा भगवान महावीर के अहिंसा, अनेकान्त व अपरिग्रह के सिद्धान्त को हम स्वीकार कर लेवें तो विश्व की समस्त समस्याओं का समाधान हो सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने उपभोग के सीमाकरण एवं समरूपता पर जोर दिया। समारोह का आभार ज्ञापन महामंत्री जतन दूगड़ ने किया।

मुनि श्री पीयूष कुमार ने कहा कि भगवान महावीर ने पारिवारिक जनों की भावना को ठेस न पहुंच इस कारण देर से दीक्षा ली। गर्भ में थे तो माता के मोह के कारण संकल्प लिया कि माता के रहते दीक्षा नहीं लूंगा। परिवार की इच्छाओं का ख्याल रखते हुए कारण शादी की। मां के देहावसान के बाद भाई से आज्ञा प्राप्त करने के लिए दो वर्ष तक रूके। उन्हें दीक्षा की प्यास थी, मुक्ति की प्यास थी परन्तु हृदय परिवर्तन द्वारा इसे साकार किया। मुनिश्री ने कहा प्रेमभाव से दूसरों को अहिंसा, नशामुक्ति की प्रेरणा दें, प्रारम्भ स्वयं से करे। सकारात्मक दृष्टिकोण से ही समाज में क्रान्ति होगी।

भगवान महावीर की सजीव झांकियां, उनके संदेश के बैनर, पोस्टर और उद्घोष के साथ बड़ी संख्या में अनुयायियों ने शिरकत की। भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच ये शोभा यात्राएं निकाली गई। शोभा यात्रा में युवा पीढ़ी ने उत्साह से भाग लिया। इस शोभायात्रा में सभी जैन अनुयायी शामिल हुए। कलाकार बच्चों ने महावीर एवं जैन मान्यता के विभिन्न रूप धारण किए।

रविवार को सुबह साढ़े सात बजे पहली शोभायात्रा भीनासर जैन जवाहर विद्यापीठ भीनासर से इन्द्रा चौक, गांधी चौक, बोथरा चौक, महाप्रज्ञ चौक, जैन मंदिर, शान्ति निकेतन, चौपड़ा गली, मालू गेस्ट हाऊस, महावीर चौक, तेरापंथ भवन होते हुए पाश्र्वचन्द्र मन्दिर घूमचक्कर पहुंची। यहां से गोपेश्वर बस्ती, लक्ष्मीनारायण मन्दिर, बड़ा बाजार होते हुए गौड़ी पाश्र्वनाथ जैन मन्दिर, बीकानेर मुख्य समारोह स्थल पहुंची।

 दूसरी शोभायात्रा दिगम्बर नसिया जी, लेडी एल्गिन स्कूल के सामने से प्रारम्भ होकर कोचरों का चौक, डागा सेठिया, पारख, रांगड़ी चौक, चिन्तामणी पाश्र्वनाथ मन्दिर, भुजिया बाजार, आदिश्वर मन्दिर, नाहटा मौहल्ला, गोलछा, रामपुरिया, आसानियों का चौक, मावा पट्टी, बैदों का महावीर जी मन्दिर, सुराणा चौक, बड़ा बाजार होते हुए गौड़ी पाश्र्वनाथ जैन मन्दिर बीकानेर मुख्य समारोह स्थल पहुंची।

शोभा यात्रा में जैन दर्शन को इंगित करती हुई झांकियां बनाई गई। वहीं ऊंट, घोड़े तथा वाहनों पर महावीर के सिद्धान्तों को प्रतिपादित करने वाले जानकारियों के पर्दे लगाए गए।

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