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नोखा में कनजी झंवर ने उड़ा रखी है भाजपा-कांग्रेस की रातों की नींद !

बीकानेर। इस साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिये सियासी सरगर्मिया अब जोर पकड़ चुकी है। चुनावी जंग जीतने के लिये भाजपा-कांग्रेस के रणनीतिकारों मोर्चाबंदी मजबूत करनी शुरू कर दी। इधर टिकट के दावेदारों ने भी दिल्ली-जयपुर तक अपने सियासी घोड़े दौड़ा दिये है।

बीकानेर में भी भाजपा-कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकारों ने जिले की सातों विधानसभा सीटो को लेकर जोड़-तोड़ शुरू कर दिया है और दोनों ही पार्टियों का खास फोकस नोखा विधानसभा सीट पर नजर आ रहा है जहां पूर्व संसदीय सचिव कन्हैयालाल की सियासी धमक ने हवाईया उड़ा रखी है। कांग्रेस के लिये यह सीट इसलिये खास महत्व रखती है क्योंकि पार्टी के नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर लाल डूडी यहां विधायक है,जबकि भाजपा इस सीट पर जीत दर्ज कराने का ख्वाब लंबे अर्से से देख रही है लेकिन कन्हैयालाल झंवर दोनों ही पार्टियों के लिये बड़ी चुनौति बने हुए है।

भाजपा बिहारीलाल को बना सकती है उम्मीदवार 

पिछले विधानसभा चुनावों में निर्दलीय मैदान में उतरे कन्हैयालाल झंवर ने भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवारों के पसीने छुड़ा दिये थे। इसबार कन्हैयालाल की चुनावी स्थिति पिछली दफा से ज्यादा मजबूत मानी जा रही है। इसलिये दोनों ही पार्टियों के चुनावी रणनीति नोखा सीट पर कन्हैयालाल झंवर को लेकर खासे आंशकित है।

भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पार्टी इस बार बिहारीलाल विश्रोई को अपना उम्मीदवार बना सकती है। कांग्रेस के ओर से रामेश्वर डूडी की टिकट भी तय मानी जा रही है,वहीं कन्हैयालाल झंवर इस बार पूरे दमखम के साथ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने के लिये तैयार।

नोखा शहर में झंवर का प्रभाव ज्यादा 

नोखा के सियासी विश्लेषकों का आंकलन है कि रामेश्वर डूडी और बिहारी विश्रोई की सियासी जंग में जाट-विश्रेाई वोटों का बंटवारा होता नजर आ रहा है और इसका सीधा फायदा कन्हैयालाल झंवर को मिल सकता है। इसके अलावा नोखा के शहरी इलाके में कन्हैयालाल झंवर का प्रभाव ज्यादा है। ऐसे में दोनों पार्टियों के आमने-सामने के मुकाबले पर पानी फिरता दिख रहा है।

पिछले विधानसभा चुनावों में कुल 1,61,141 वोटिंग में कांग्रेस के रामेश्वर डूडी ने 70,80,निर्दलीय कन्हैयालाल झंवर ने 40,007 तथा तीसरे नंबर पर रहे बिहारी लाल विश्रोई ने 35,365 वोट हासिल किये जबकि भाजपा प्रत्याशी सहीराम विश्रोई की जमानत भी नहीं बच पायी थी।

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