बीकानेर

पीबीएम अस्पताल में दवाओं का टोटा, होलसेल भंडार ने हाथ किये खड़े

बीकानेर।  पिछला बकाया नहीं चुकाने के कारण बिगड़ी साख के चलते लाख कोशिशों के बावजूद पीबीएम हॉस्पिटल को टैंडर से लेकर रेट कांट्रेक्ट तक में स्थानीय फार्मासिस्ट महंगी दवाइयां, प्रत्यारोपण उपकरण उधार देने से हिचकिचा रहे हैं। नतीजा उन मरीजों को भुगतना पड़ रहा है जिनका इलाज भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में निशुल्क होना है।

अब इसी महीने मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौर और उससे पहले प्रमुख सचिव और चिकित्सा मंत्री के भी आने के संकेतों ने हॉस्पिटल-कॉलेज प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। हालात सुधारने के लिए काफी प्रयास कर उस होलसेल भंडार को इमरजेंसी दवाइयां-उपकरण देने के लिए राजी किया है जिसका पहले से पीबीएम हाॅस्पिटल के साथ हिसाब बकाया है।

शुक्रवार को भंडार के अध्यक्ष लाखनसिंह और जीएम के साथ प्राचार्य डा.आर.पी.अग्रवाल, सुपरिंटेंडेंट डा.पी.के.बैरवाल आदि ने मीटिंग की। भंडार ने फिर अपना बकाया चुकाने की बात कही, तो पुराने बिल देने को कहा। संभागीय आयुक्त के साथ हुई एक मीटिंग के निर्णय अनुसार इन बिलों में से 10 फीसदी कटौती कर बाकी पैसा भंडार को दिया जाएगा।

दवाइयों की आपूर्ति नहीं होने का सबसे बड़ा खमियाजा उन दुर्घटना पीड़ितों को भुगतना पड़ रहा है जिनके रॉड-स्क्रू आदि उपकरण लगने हैं। इनकी आपूर्ति नहीं हो रही। ऐसे में पांच-सात मामले एक साथ होने पर शॉर्ट टर्म टैंडर करते हैं। यह टैंडर कॉल होने के बाद भी आपूर्ति में आठ से दस दिन लगते हैं। ऐसे में अधिकांश मामलों में ऑपरेशन होते-होते पूरा महीना गुजर जाता है। इससे परेशान कई मरीज भामाशाह में रजिस्ट्रेशन ही नहीं करवाते। अपने खर्च पर ही ऑपरेशन करवा लेते हैं।

पीबीएम को बाजार से क्यों नहीं मिल रही दवाइयां

बीकानेर के कई सप्लायर-कैमिस्ट पीबीएम को इसलिए दवाई नहीं दे रहे क्योंकि उनका पुराना भुगतान एक विवाद में अटक गया। हॉस्पिटल के लाइफ सेविंग मेडिकल घोटाले के बाद वहां के कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क चोरी हो गई। ऐसे में दवाइयां की आपूर्ति और भुगतान का प्रमाण नहीं मिला। कई सप्लायर्स का पैसा अटक गया। इसके बाद से ही कैमिस्ट जहां अपने भुगतान के लिए दबाव बना रहे हैं वहीं नई आपूर्ति भी लगभग बंद कर चुके हैं। लगभग यही स्थिति होलसेल भंडार की भी है। उसने बाजार से दवाइयां खरीदकर पीबीएम को आपूर्ति की। पैसा नहीं मिला तो बाजार को भुगतान नहीं किया।

भंडार व पीबीएम के बीच भी रस्साकशी

होलसेल भंडार ने पीबीएम हॉस्पिटल पर लगभग 2.16 करोड़ रुपए बकाया लगभग पांच साल पहले निकाले। इसके बाद दो बार में लगभग 34 लाख का भुगतान हो गया। फिर भी 1.82 करोड़ अटक गए। संभागीय आयुक्त के साथ मीटिंग के बाद मूल बिलों का दुबारा आंकलन कर 10 फीसदी कटौती के बाद भुगतान का निर्णय हुआ लेकिन सिरे नहीं चढ़ा। हॉस्पिटल प्रशासन ने शुक्रवार को दुबारा बातचीत शुरू कर भुगतान का निर्णय लिया है।

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