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इसबार रक्षाबंधन पर नहीं होगा भद्रा का साया, राखियों से सजे बीकानेर के बाजार !

बीकानेर। रक्षाबंधन के मौके पर अक्सर भद्रा काल में राखी नहीं बांधी जाती है लेकिन इस साल भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन का त्योहार श्रावणी पूर्णिमा 26 अगस्त को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य सूरजकरण व्यास का कहना है कि इस दिन पूर्णिमा तिथि शाम 5.26 तक होने से यह त्योहार पूरे दिन मनाया जाएगा। शास्त्रानुसार रक्षाबंधन में भद्रा टाली जाती है, जो इस बार पूरे दिन नहीं है। चार साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है तब रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा।

यह है समय

सुबह 7.43 से 9.18 तक चर, सुबह 9.18 से 10.53 तक लाभ, सुबह 10.53 से 12.28 तक अमृत, दोपहर 2.03 से 3.38 तक शुभ, शाम 6.48 से 8.13 तक मुहूर्त रहेगा। ज्योतिष पंचांगों के मुताबिक पूर्णिमा तिथि 25 अगस्त को दोपहर 3.25 बजे से प्रारंभ हो जाएगी। जो 26 अगस्त को शाम 5.30 तक रहेगी। इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र दोपहर 12.35 बजे तक रहेगा। रक्षाबंधन का मुहूर्त 26 अगस्त को सुबह 7.43 से दोपहर 12.28 बजे तक रहेगा। इसके बाद दोपहर 2 से 4 तक रहेगा। सूर्योदय व्यापिनी तिथि मानने के कारण रात में भी राखी बांधी जा सकेगी।

ग्रहण मुक्त है राखी

पिछले साल राखी का त्यौहार भद्रा और ग्रहण होने के कारण बहुत ज्यादा सौभाग्यशाली नहीं माना गया था लेकिन इस बार राखी ग्रहण से मुक्त है क्योंकि इस वर्ष का दूसरा और अंतिम चंद्रग्रहण 28 जुलाई को लगा था। श्रावण पूर्णिमा इस बार ग्रहण से मुक्त रहेगी जिससे यह और भी सौभाग्यशाली रहेगी।

नहीं बनेगा बाधक

रक्षाबंधन के दिन घनिष्ठा नक्षत्र होने के कारण पंचक रहेगा, लेकिन राखी बांधने में यह बाधक नहीं बनेगा। घनिष्ठा से रेवती तक पांच नक्षत्रों को पंचक कहा जाता है। यह पांच दिनों तक चलता है। पंचक को लेकर भ्रांति यह है कि इसमें कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए। पंचक में अशुभ कार्य नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनकी पांच बार पुनरावृत्ति होती है। पंचक में शुभ कार्य करने में कोई दिक्कत नहीं है। पर्व के सिंह के सूर्य में आने से इसकी महत्वता और बढ़ गई है।

राखियों की दुकानों पर कहीं सजे डोरीमोन, तो कहीं मोटू-पतलू

बीकानेर। कहते हैं राखी के धागे का कोई मोल नहीं होता। यह अनमोल बंधन हैए जो एक बार कलाई पर बंध जाएं तो जीवन भर का संबंध बना देता है। जी हां, भाई बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन करीब आठ दिन बाद है। इसके लिए शहर के बाजार सज गए हैं। दस रुपए से पांच सौ और इससे भी अधिक के स्नेह बंधन यानी राखियां बाजार में बिकने को तैयार हैं। अलग-अलग आयु वर्ग की जरूरत के अनुरूप राखियां बाजार में हैं। बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर से सजी राखियां हैं तो किशोरों को बोलने वाली राखियां पसंद है।

इन राखियों में एक बटन दबाओ तो यह बोलकर भाई बहन का स्नेह प्रदर्शित करती हैं। राखी विक्रेताओं के मुताबिक यह राखियां बालक ही नहीं बालिकाओं को ध्यान में रखकर भी डिजाइन की गई है। इसमें राखी पर गुडिय़ा का आकार दिया गया है। इसके साथ ही मोटू पतलू भी बच्चों की पसंद बने हुए हैं। इन कार्टून कैरेक्टर के साथ लाइटिंग की व्यवस्था वाली राखियां भी बाजार में है।

चांदी के धागे बने पसंद इसके साथ ही महंगे किस्म के चांदी के धागे भी लोगों की पसंद बने हुए हैं। इन धागों में चांदी की पॉलिश की गई है वहीं एक विशेष किस्म के धागे ऐसे भी है जिन्हें पूरी तरह से चांदी से ही तैयार किया गया है। इसके साथ ही मोती की राखियां भी खूब पसंद की जा रही है।

महिलाओं के लिए रजवाड़ी स्टाइल

जहां भाइयों के लिए कई तरह के डिजाइन बाजार में है वहीं भाभी के लिए रजवाड़ी स्टाइल की राखियां बाजार में उतारी गई हैं। इनमें राखी को कड़े का आकार दिया गया है। कलाई पर सजी राखी चूड़ी जैसी नजर आती है और इसमें लगी लूंबी इसके परम्परागत होने का भी एहसास करवाती है। यहां से आ रही हैं राखियां राखियों की बड़ी रेंज शहर में पश्चिम बंगाल के कोलकाता से आ रही है। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न शहरों की राखियां भी लोगों को लुभा रही है। कुछ राखियां में गुजराती लुक है।

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