बीकानेर

मंगोलिया से आए हंसों के झुंड में दिखा दुर्लभ ‘लेजर व्हाइट गूज’


बीकानेर. वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट इन दिनों पक्षियों की गणना कर रहा है। विभाग के अफसर गजनेर के पास दरबारी गांव पहुंचे। वहां पानी की झील है, जहां जंगली जानवर और पक्षी पानी पीने आते हैं। अफसरों ने वहां मौजूद हंसों के फोटो अपने कैमरे में कैद कर लिए। इन फोटो को सोशल मीडिया पर डाला तो चाैंकाने वाली जानकारी सामने आई। हंसों के उस झुंड में दुर्लभ प्रजाति का पक्षी भी है। इसका नाम लेजर व्हाइट गूज है। इस खुलासे के बाद बर्ड वॉचर उसे देखने को लालायित हैं।
लेजर व्हाइट गूज मंगोलिया से हंसों के झुंड के साथ हजारों मील की यात्रा करके यहां पहुंचा है। वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञों का दावा है कि यह पक्षी मरुस्थल में पहली बार और राजस्थान में दूसरी बार रिपोर्ट हुआ है। यह पक्षी काफी दुर्लभ और लुप्त होने के कगार पर है। इंटरनेशनल यूनियन कंजर्वेशन ऑफ नेचर(आईयूसीएन) ने अपनी रेड लिस्ट में इसे 2015 में शामिल किया था। दुनिया में इसकी संख्या 18-22 हजार ही आंकी गई है।
डीएफओ वाइल्ड लाइफ रामनिवास कुमावत ने हंसों के साथ झील में तैरते लेजर व्हाइट फ्रंटेज गूज को अपने कैमरे में कैद किया था। यह पक्षी 21 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं, जो पक्षी प्रजाति में सर्वाधिक है। मंगोलिया, नॉर्थ नॉर्वे, स्वीडन, हंगरी, ग्रीस, बुल्गारिया, टर्की आदि ठंडे प्रदेश इनका ठिकाना है।
”बीकानेर के जंगलों और तालाबों के किनारे इन दिनों पक्षियों की गणना कराई जा रही है। गजनेर के पास दरबारी गांव की झील किनारे हंसों के साथ पहली बार लेजर व्हाइट फ्रंटेड गूज देखा गया है। दुनिया में यह पक्षी दुर्लभ की श्रेणी में शामिल है।” रामनिवास कुमावत, डीएफओ, वाइल्ड लाइफ
”पक्षी प्रेमियों के लिए यह सुखद अहसास है। प्रवासी दुर्लभ पक्षी इस मरुस्थल में नजर आने लगे हैं। लेजर व्हाइट फ्रंटेड गूज अत्यंत ही दुर्लभ है। हजारों मील का सफर तय करके इसका यहां तक आना अद्भुत है। इससे पहले यह भरतपुर के केवला देवी अभयारण्य में देखा गया था। ”- डॉ.प्रताप सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर,लेबोरेटरी ऑफ वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट, जूलॉजी, डूंगर कॉलेज
दैनिक भास्कर रिपोर्ट

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