त्यौहारधर्म

शीतला अष्टमी मुहूर्त: जानें कब और कैसे करें शीतला अष्टमी की पूजा

होली के बाद विभिन्न पर्व और त्योहारों की शृंखला में अब शीतला अष्टमी यानी बासीड़ा मनाने की तैयारियां शुरू हो गई

बीकानेर।  शीतला अष्टमी को बसौड़ा पूजा भी कहा जाता है। मुख्य रूप से चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है।  ये होली से ठीक आठ दिनों बाद मनाई जाती है। इस साल शीतला अष्टमी 9 मार्च को पड़ रही है। हिंदू व्रतों में ये केवल एक ही ऐसा व्रत हैं जिसमें बासी खाना खाया जाता है। इसलिए इसे बसौड़ा भी कहते हैं जिसका मतलब होता है बासी भोजन।

शीतला अष्टमी की तैयारियां शुरू

‘ होली के बाद विभिन्न पर्व और त्योहारों की शृंखला में अब शीतला अष्टमी यानी बासीड़ा मनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। घर-घर में पीने के पानी के लिए मिट्टी से बनी मटकियों के पूजन की परम्परा को लेकर शहर में इनकी बिक्री शुरू हो गई है। बीकानेर सार्दुल सिंह सर्किल पर मटकियों की खरीदारी जमकर हो रही है। 

वहीं जूनागढ़ के आगे कैर-सांगरी सहित अन्य सूखी सब्जियों की खरीद भी लोग कर रहे है। इस मौके पर श्रद्धालु उपवास रखेंगे। ऐसी मान्यता है कि जिस घर की महिलाएं शुद्ध मन से इस व्रत को करती हैं, उस परिवार को मां शीतला धन-धान्य से पूर्ण कर प्राकृतिक विपदाओं से दूर रखती हैं। शीतला माता हर तरह के तापों का नाश करती हैं और अपने भक्तों के तन-मन को शीतल करती हैं। ‘ 

क्या है शीतला अष्टमी का महत्व

शीतला अष्टमी से जुड़ी कई मान्यताएं समाज में प्रचलित हैं। महिलाएं अपने बच्चों की सलामती, उन्हें हर प्रकार के रोगों से दूर रखने के लिए और घर में सुख समृद्धि के लिए शीतला माता की पूजा करती हैं। मान्यता है कि जिस घर में शुद्ध मन से शीतला माता की पूजा होती है वहां हर प्रकार से सुख समृद्धि बनी रहती है. बताया जाता है कि जिस घर में चेचक से कोई बीमार हो, उसे ये पूजा नहीं करनी चाहिए।

क्या है पूजा विधि?

शीतला माता की पूजा के दिन यानी शीतला अष्टमी को चूल्हा नहीं जलाने की परंपरा है। शीतला अष्टमी से एक दिन पहले ही खाना बनाकर रख लिया जाता है। इसके बाद सुबह जल्दी उठकर शीतल माता की पूजा करने के बाद बसौड़े के तौर पर मीठे चावल का प्रसाद चढ़ाया जाता है। कई लोग इस दिन शीतली माता के मंदिर जाकर हल्दी और बाजरे से पूजा भी करते हैं. पूजा के बाद बसौड़ा व्रत कथा कही जाती है। पूजा के बाद परिवार के सभी लोगों को प्रसाद देकर एक दिन पहले बनाया गया बासी भोजन खाया जाता है।

पूजा मुहूर्त

शीतली अष्टमी के पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06: 41 से शाम 06: 21 तक रहेगा।अष्टमी तिथि 9 मार्च यानी शुक्रवार से सुबह 3:44 से शुरू होगी जो शनिवार सुबह 6 बजे तक रहेगी।

 देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए फेसबुक पेज को लाइक करें

 

Tags
Show More

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Close

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker