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बीकानेर शहर में आकर्षण का केंद्र है, “करोड़पति महादेव मंदिर ”

लालेश्वर महादेव को करोड़पति महादेव के नाम से भी जाना जाता है इस मंदिर की एक खास बात यह भी है कि इसमें स्थापित लालेश्वर महादेव की प्रतिमा चार मुखी है, वहीं पांचवां मुख छत पर स्थापित है इसके चारों कोनों पर सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष तथा छत पर ईशान नामक शिवलिंग स्थापित है ! 

शिव बाड़ी मंदिर राजस्थान के शहर बीकानेर के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। यह बीकानेर शहर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और राजस्थान का टूर कर रहें हों तो यहां आना तो बनता है। स्थानीय लोग इसे लालेश्वर महादेव के नाम से भी जानते हैं बीकानेर के इस शिव बाड़ी मंदिर का निर्माण महाराजा डूंगर सिंह जी ने 19वीं सदी में करवाया था लाल बलुआ पत्थरों से बना शिव बाड़ी मंदिर वास्तुकला का एक शानदार नमूना है

 शिव बाड़ी मंदिर की मुख्य विशेषताएं इसके मंडप, गुंबद और खूबसूरत खंबे हैं शिव बाड़ी मंदिर चारों ओर से बड़े बड़े पत्थरों वाली दीवार से घिरा हुआ है जिससे इस मंदिर को अलग और शांत चरित्र मिलता है। शिव बाड़ी मंदिर का मुख्य आकर्षण यहां भगवान शिव की संगमरमर से बनी प्रतिमा है। इस मंदिर में भगवान शिव के साथ रहने वाले पवित्र नंदी की भी कांस्य प्रतिमा है

 

बीकानेर के शिव बाड़ी मंदिर में दो विशाल बावडि़यां हैं। शिव बाड़ी मंदिर का बाहरी हिस्सा भी बहुत सुंदर है और यहां भगवान कृष्ण और गोपियों की प्रतिमाएं हैं। सावन के महीने में शिव बाड़ी मंदिर में पूरे देश से हजारों भक्त भगवान के दर्शन और पूजन के लिए आते हैं।

 

मंदिर के इतिहास पर एक नजर

श्री लालेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना 19 मई 1880 ई. बुधवार विक्रम संवत 1937 वैशाख शुक्ल 10 दिन कुलीर लग्न के स्थिर नवांश में हुई थी। वर्तमान में यहां के अधिष्ठाता संवित सोमगिरी हैं, जो 20 नवम्बर 1994 से आसीन हैंं। मंदिर को तत्कालीन बीकानेर नरेश महाराजा डूंगर सिंह द्वारा अपने पिताश्री महाराज लाल सिंह जी के निमित्त बनवाया गया था।

 

लालेश्वर महादेव प्रतिमा के सामने श्री नन्दीश्वर तथा परिसर में महागौरी, कार्तिकेय तथा गणेश की प्रतिमा स्थापित है। इसी प्रकार यहां सद्योजात शिवलिंग, भगवान वेदव्यास तथा भगवान भाष्यकार शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित है। गर्भगृह में शिव परिवार के साथ करणीमाता के भित्ति चित्रों को सुनहरी कलम से बनाया गया है गर्भगृह में ही श्रीलालेश्वर विग्रह के साथ ब्रह्माजी, दो शिवपुत्र स्थानीय महंत, तत्कालीन महाराजा डूंगर ङ्क्षसह एवं महाराजा लाल सिंह की चित्रों को उकेरा गया है

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