बीकानेर

बीकानेर में केंद्रीय मंत्री ऊंटनी का दूध निकाल कर पीते नज़र आये, तस्वीरें हुई वायरल !

बीकानेर। बीकानेर के उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र में केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत ने कैमल सफारी कर ऊंटनी का दूध निकाल कर पिया। इस दौरान वे ऊंट के बच्चे को भी गले लगा कर दुलारते भी नजर आए। 

राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र ने ऊंट को बचाने के लिए इसे एक दूधारू पशु के रूप में बेहतर विकल्प सुझाया है। ऊंटनी के दूध के औषधीय गुणों का भी पता लगाया है। ऊंटों की संख्या तेजी से घट रही है, ऐसे में दूध का व्यावसायीकरण जरूरी है। यह बात रविवार को केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पशुपालक कृषक-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम में कही।

मंत्री ने उष्ट्र संग्रहालय, डेयरी, फीड टेक्नोलॉजी आदि का निरीक्षण भी किया। उन्होंने यहां ऊंटनी का दूध पीया और कैमल सफारी की। केन्द्र निदेशक डॉ. एनवी पाटिल ने कहा कि केन्द्र ऊंटनी के दूध पर अनुसंधान कर इसका महत्व साबित कर चुका है, अब इसका विपणन किया जाना है। इसके लिए नीतिगत सहयोग की आवश्यक है।

इस अवसर पर केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान के निदेशक डॉ. पीएल सरोज ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में प्रो. एके गहलोत, क्यूआरटी के अध्यक्ष, प्रगतिशील उष्ट्र पालक जगमाल सिंह राईका, शंकर रेबारी, श्रेयकुमार आदि उपस्थित थे।

पत्रकारों से बातचीत में कहा किसान आंदोलन राजनीति से प्रेरित 

केन्द्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण राज्यमंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में किसान आंदोलन को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन मुद्दों पर पहले ही निर्णय हो चुका है उन्हें लेकर कांग्रेस किसानों को भ्रमित कर राजनीतिक मुद्दा बना रही है। कई राज्यों में स्टिंग में खुलासा भी हुआ कि किसानों को पैसे देकर दूध सड़कों पर बहाया गया।

राज्यमंत्री शेखावत ने कहा कि केन्द्र सरकार ने किसानों का लागत मूल्य से डेढ़ गुणा समर्थन मूल्य देने की बजट में घोषणा की हुई है। स्वामी नाथन की रिपोर्ट सरकार ने लागू कर दी है। आज देश में किसान और स्वामीनाथन की रिपोर्ट का मुद्दा उठाना फैशन बन गया है। जो भी इस रिपोर्ट की बात करते हैं, मेरा दावा है कि उन्होंने रिपोर्ट को पढ़ा तक नहीं है।

एक सवाल के जवाब में शेखावत ने कहा कि दूध को समर्थन देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दूध की कीमत विश्व बाजार में मिल्क पाउडर और बटर से तय होती है। भारत का मिल्क पाउडर मंहगा होने से विश्व बाजार में नहीं बिकता। इसके बावजूद सरकार ने देश की किसी भी कॉपरेटिव डेयरी में दूध के भाव कम नहीं होने दिया हैं।

प्रदेशाध्यक्ष का सवाल राष्ट्रीय अध्यक्ष से पूछें

राजस्थान में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के सवाल को टालते हुए केन्द्रीय राज्य मंत्री शेखावत ने कहा कि यह राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री से पूछें। पार्टी में लोकतंत्र है और कार्यकर्ताओं सुना जाता है। भाजपा में यह स्वस्थ परम्परा है। मैं जिस विचारधारा से आया हूं वहां व्यक्ति या दायित्व महत्वपूर्ण नहीं है। संगठन के पदाधिकारी जो काम करना तय करते है वही किया जाता है। पहले सीमा क्षेत्र का काम सौंपा, फिर राजनीति में लाए। अब अगर मुझे वनवासी जन कल्याण के क्षेत्र में काम करने का कहे तो वहां भी काम करूंगा।

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