त्यौहारधर्म

जाने क्या है ‘नरक चौदस’, ‘रूप चौदस’, ‘छोटी दीपावली’ का महत्व !

नरक चतुर्दशी कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को कहा जाता है। नरक चतुर्दशी को ‘छोटी दीपावली’ भी कहते हैं। इसके अतिरिक्त इस चतुर्दशी को ‘नरक चौदस’, ‘रूप चौदस’ या ‘नरका पूजा’ के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार यह माना जाता है कि कार्तिक कृष्णपक्ष चतुर्दशी के दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विधान है।दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी के दिन संध्या के पश्चात दीपक प्रज्जवलित किए जाते हैं। इस चतुर्दशी का पूजन कर अकाल मृत्यु से मुक्ति तथा स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यमराज जी की पूजा व उपासना की जाती है।

स्‍नान और दीपदान का मुहूर्त

अभ्यंग स्नान का मुहूर्त सुबह 04:47 से 06:27 तक रहेगा. इसकी अवधि 1 घंटे 40 मिनट रहेगी. दीपदान का मुहूर्त शाम 6 से 7 बजे तक रहेगा. यम दीपदान के लिए चार बत्ती वाला मिट्टी का दीपक घर के मुख्य द्वार पर रखना चाहिए

जाने क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी 

प्रागज्योतिषपुर नगर का नरकासुर नामक राजा था जो एक राक्षस था. उसने अपनी शक्ति से इंद्र और अन्य सभी देवताओं को परेशान कर दिया था. वह जनता के साथ ही संतों पर भी अत्याचार करता था. उसने अपने पास प्रजा और संतों की 16 हजार स्त्रियों को बंदी बना लिया था

उसके अत्याचारों से परेशान देवता और संत मदद मांगने के लिए भगवान श्री कृष्ण की शरण में गए. भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें नराकासुर से मुक्ति दिलाने का आश्वसान दिया. नरकासुर को स्त्री के हाथों मरने का श्राप था इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को सारथी बनाया और फिर उन्हीं की सहायता से नरकासुर का वध कर दिया.  

इस प्रकार श्रीकृष्ण ने कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर देवताओं व संतों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई. इसी की खुशी में दूसरे दिन यानि कार्तिक मास की अमावस्या को लोगों ने अपने घरों में दीये जलाए. तभी से नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली का त्योहार मनाया जाने लगा.  

ऐसे करें पूजा 

नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले उठना चाहिए. इस दिन तेल से नहाया जाता है. नहाने के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं फिर भगवान श्री कृष्ण की अराधना करें. पूजा के समय फल, फूल और धूप लगाएं. दीये के लिए मिट्टी के दीपक की जगह आटे से बना दीया जलाएं. शाम को दहलीज पर पांच या सात दीये लगाएं.

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